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सभ्यता का मोल

कुत्ताकुतिया  अपने परिवार के साथ आगे बढ़ रहे  थे. इस बार बच्चे शांत थे. मानो धमाचौकड़ी और चुस्तीफुर्ती सब भूल चुके हों. कुतिया जल्दी से जल्दी किसी साधारण बस्ती में पहुंच जाना चाहती थी. मगर उससे अगली बस्ती भी संभ्रांत लोगों की थी. चारों ओर आलीशान कोठियां जगमगा रही थीं. कुतिया उस बस्ती को जल्दी से जल्दी पार कर देना चाहती थी, इसलिए वह तेजतेज चलने लगी.

चौराहा पार कर वे एक खुले मैदान में आ गए. एक घर के सामने एक छोटी बच्ची को गुमसुम खड़े देख कुतिया के पांव यकायक ठिठक गए. एक साथ इतने छोटे बच्चों को देखकर उस बच्ची की आंखों में भी चमक उभरी. लेकिन अगले ही पल वह शून्य में बिला गई. कुतिया वहां से चली जाना चाहती थी, कि तभी उसका सबसे छोटा बच्चा भागकर उस बच्ची के पास चला गया. एक छोटे और प्यारे से पिल्ले को अपने पास खड़ा देखकर लड़की पहले तो थोड़ी घबराई, फिर हिम्मत करके अपना एक हाथ पिल्ले की पीठ तक ले गई. और प्यार से हौलेहौले सहलाने लगी. परंतु अगले ही पल उसको न जाने क्या सूझा कि यकायक अपना हाथ पीछे हटा लिया.

कुतिया बड़े ध्यान से उसको देख रही थी.

भरोसा रखो मेरी बच्ची, यह तुम्हें कतई नुकसान नहीं पहुंचाएगा. यह एकदम तुम्हारे जैसा ही मासूम और भोला है.’ कुतिया लड़की की ओर देखकर बोली. वह सूनीसी आंखें लिए कुतिया की ओर देखने लगी.

हालांकि हमें देर हो रही है. फिर भी तुम यदि चाहो तो कुछ देर इसके साथ खेल सकती हो. इसे भी तुम्हारे साथ खेलने में खूब मजा आएगा.’ कुतिया दुबारा बोली. लड़की की निगाहें उसके बच्चों पर टिकी हुई थीं.

ये सब तुम्हारे ही बच्चे हैं?’ अंततः लड़की ने हिम्मत दिखाई.

बिलकुलइन्हें मैंने ही समयसमय पर जना है.’ कुतिया ने अपने भरेपूरे परिवार पर निगाह डालकर गर्व सहित बोली.

सभी लड़केहैं न!’ लड़की  ने अप्रत्याशितसा  प्रश्न किया. कुतिया समझ न पाई कि क्या कहे.

क्या तुम्हें इनमें से कोई पसंद है? हालांकि इस बस्ती में मैं अपने किसी भी बच्चे को छोड़ना नहीं चाहती. फिर भी जिसे तुम पसंद करो, अगर उसको कोई आपत्ति न हो तो कुछ दिन तक तुम उसे अपने साथ ले जा सकती हो.’ कुतिया मुस्कराई.

सभी लड़के हैं न!’ लड़की ने अपना प्रश्न दोहराया.

नहीं, इनमें आठ मादा हैं, नर केवल तीन हैं.’

झूठ, तुम झूठ बोल रही हो?’ लड़की गुस्से में बोली.

इसमें झूठ बोलने की भला क्या बात है? जो सच है, मैं वही बता रही हूं.’ कुतिया का असमंजस बढ़ता ही जा रहा था.

झूठ ही तो है. मेरे पापा कहते हैं कि हमें दूसरी लड़की नहीं चाहिए. वे मम्मी को अस्पताल लेकर गए हैं, कहते हैं कि इस बार भी मां के पेट में जो बच्चा है, वह लड़की है. आपरेशन कराना होगा. जब मेरे मम्मीपापा दो लड़कियां नहीं पाल सकते, तब तुम आठ बच्चियों को कैसे रख सकती हो.’ लड़की ने कहा. उसके स्वर में गहरी वेदना थी.

हम उतने सभ्य नहीं है न बेटा…’ लड़की की पीड़ा कुतिया के अंतर्मन को भेद गई. उसने तुरंत अपना चेहरा दूसरी ओर घुमा लिया और अपने परिवार के साथ आगे बढ़ने लगी

ओमप्रकाश कश्यप

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2 comments on “सभ्यता का मोल

  1. ओह!! किस तरह टर्न लिया…वाकई मार्मिक!!!

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