Archive | मई 2010

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दंश – दसवीं किश्त

धारावाहिक उपन्यास अगले ही पल दरोगा ने सिपाही को इशारा किया. लड़खड़ाते कदमों से वह हवालात की ओर बढ़ गया. चलते–चलते उसने जेब से चाबियों का गुच्छा निकाला. हवालात का दरवाजा खुलते ही बापू फौरन बाहर आ गया. वह बहुत कमजोर दिख रहा था. मगर व्यवहार में लापरवाही अब भी बाकी थी. हवालात से निकलने […]

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