Archive | जून 2010

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दंश – ग्यारहवीं किश्त

दंश — धारावाहिक उपन्यास साधारण इंसान कहने से क्या बापू के पाप कम हो जाते हैं? यह कहकर क्या जिम्मेदारी से भागा जा सकता है? नहीं न! बापू को इससे पहले भी मैं अपना सगा नहीं मानता था. इस घटना के बाद तो जैसे संबंध टूट की गया. घटना क्या, वह एक आंधी थी. जिसने […]

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