Archive | अगस्त 2017

You are browsing the site archives by date.

अछूत

ईश्वर पुजारी को रोज चढ़ावा समेटकर घर ले जाते हुए देखता. उसे आश्चर्य होता. दिन–भर श्रद्धालुओं को त्याग और मोह–ममता से दूर रहने का उपदेश देने वाला पुजारी इतने सारे चढ़ावे का क्या करता होगा? एक दिन उसने टोक ही दिया—‘तुम रोज इतना चढ़ावा घर ले जाते हो. अच्छा है, उसे मंदिर के आगे खड़े […]

Advertisement

Rate this:

अच्छे दिन

चारों ओर बेचैनी थी. गर्म हवाएं उठ रही थीं. ऐसे में तानाशाह मंच पर चढ़ा. हवा में हाथ लहराता हुआ बोला— ‘भाइयो और बहनो! मैं कहता हूं….दिन है.’ भक्त–गण चिल्लाए—‘दिन है.’ ‘मैं कहता हूं….रात है.’ भक्त–गण पूरे जोश के साथ चिल्लाए—‘रात है.’ हवा की बेचैनी बढ़ रही थी. बावजूद उसके तानाशाह का जोश कम न […]

Rate this:

समाधान

तानाशाह ने पुजारी को बुलाया—‘राज्य में सिर्फ हमारा दिमाग चलना चाहिए. हमें ज्यादा सोचने वाले लोग नापसंद हैं.’ ‘एक–दो हो तो ठीक, पूरी जनता के दिमाग में खलबली मची है सर!’ पुजारी बोला. ‘तब आप कुछ करते क्यों नहीं?’ ‘मुझ अकेले से कुछ नहीं होगा.’ ‘फिर….’ इसपर पुजारी ने तानाशाह के कान में कुछ कहा. […]

Rate this: