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तानाशाह

तानाशाह ने हंटर फटकारा —‘मैं पूरे राज्य में अमन–चैन कायम करने की घोषणा करता हूं. कुछ दिन के बाद तानाशाह ने सबसे बड़े अधिकारी को बुलाकर पूछा—‘घोषणा पर कितना अमल हुआ?’ ‘आपका इकबाल बुलंद है सर! पूरे राज्य में दंगा–फसाद, चोरी चकारी, लूट–मार पर लगाम लगी है. आपकी इच्छा के बिना लोग सांस तक लेना […]

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छोटा मंदिर : बड़ा मंदिर

एकांत देख बड़े मंदिर का ईश्वर अपने स्थान से उठा. बैठे–बैठे शरीर अकड़ा, पेट अफरा हुआ था. डकार लेते–लेते नजर सामने खड़ी कृषकाय आकृति पर नजर पड़ी. बड़े मंदिर का ईश्वर कुछ पूछे उससे पहले ही वह बोल पड़ी—— ‘हम दोनों एक हैं.’ ‘होंगे, मुझे क्या!’ बड़े मंदिर के ईश्वर ने तपाक से कहा. ‘बस्ती […]

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वयं ब्रह्माव

तानाशाह हंटर फटकारता है. लोग सहमकर जमीन पर बिछ जाते हैं. कुछ पल बाद उनमें से एक सोचता है—‘तानाशाही की उम्र थोड़ी है. जनता शाश्वत है.’ उसके मन का डर फीका पड़ने लगता है. ‘अहं ब्रह्मास्मिः!’ कहते हुए वह उठ जाता है. उसकी देखा–देखी कुछ और लोग खड़े हो जाते हैं. सहसा एक नाद आसमान […]

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वह कला ही क्या जो आमजन के लिए न हो : डॉ. लाल रत्नाकर

फारवर्ड प्रेस में महिषासुर, मक्खलि गोशाल, कौत्स, अजित केशकंबलि सहित अन्य कई बहुजन नायकों के चित्र बनाकर उन्हें जनसंस्कृति का हिस्सा बना देने वाले डॉ. लाल रत्नाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित, प्रतिबद्ध कलाकार हैं. अपने चित्रों में उन्होंने भारत के ग्रामीण जीवन को हमारे सामने रखा है. पिछले दिनों उनके आवास पर लंबी चर्चा हुई. […]

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वेन की कथा

‘वेन उदार है….’ ‘वेन वीर है….’ ‘वेन निष्पक्ष, न्यायकर्ता है….’ ‘वेन का जन में विश्वास है….’ ‘अब से वेन ही हमारे सम्राट होंगे….’ ‘सम्राट अमर रहें….’ जयघोष के साथ दर्जनों मुट्ठियां हवा में लहराने लगीं. लोग खुशी से चिल्ला उठे. वेन को सम्राट चुन लिया गया. ऋषिकुल देखते रह गए. अभी तक उन्होंने राजतंत्रों को […]

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नियुक्ति

अकादमी के शीर्षस्थ पद के लिए प्रत्याशियों को बुलाया गया. भर्ती के लिए दो प्रकार की परीक्षाएं तय थीं. पहली परीक्षा के लिए प्रत्याशियों को एक हॉल में बिठाया गया. उनके ठीक सामने एक मंदिर था. मंदिर में एक त्रिशूल रखा गया था. त्रिशूल के आगे पत्र-पुष्प, फूलमालाएं, चंदन लेप, धूप-दीप-नैवेद्य रखे थे. बराबर में […]

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विविध की डायरी

बालकहानी विविध के दादू को डायरी लिखने का शौक है. बोर्डिंग में जाने पर विविध को घर की याद आई तो उसने भी कलम उठा ली. ये पन्ने उसी की डायरी के हैं, जो उसने अपने दादू को संबोधित करते हुए लिखे हैं— 17 फरवरी 2015 आज बोर्डिंग का तीसरा दिन है. मैं दो दिनों […]

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