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वयं ब्रह्माव

तानाशाह हंटर फटकारता है. लोग सहमकर जमीन पर बिछ जाते हैं. कुछ पल बाद उनमें से एक सोचता है—‘तानाशाही की उम्र थोड़ी है. जनता शाश्वत है.’ उसके मन का डर फीका पड़ने लगता है. ‘अहं ब्रह्मास्मिः!’ कहते हुए वह उठ जाता है. उसकी देखा–देखी कुछ और लोग खड़े हो जाते हैं. सहसा एक नाद आसमान […]

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वह कला ही क्या जो आमजन के लिए न हो : डॉ. लाल रत्नाकर

फारवर्ड प्रेस में महिषासुर, मक्खलि गोशाल, कौत्स, अजित केशकंबलि सहित अन्य कई बहुजन नायकों के चित्र बनाकर उन्हें जनसंस्कृति का हिस्सा बना देने वाले डॉ. लाल रत्नाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित, प्रतिबद्ध कलाकार हैं. अपने चित्रों में उन्होंने भारत के ग्रामीण जीवन को हमारे सामने रखा है. पिछले दिनों उनके आवास पर लंबी चर्चा हुई. […]

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वेन की कथा

‘वेन उदार है….’ ‘वेन वीर है….’ ‘वेन निष्पक्ष, न्यायकर्ता है….’ ‘वेन का जन में विश्वास है….’ ‘अब से वेन ही हमारे सम्राट होंगे….’ ‘सम्राट अमर रहें….’ जयघोष के साथ दर्जनों मुट्ठियां हवा में लहराने लगीं. लोग खुशी से चिल्ला उठे. वेन को सम्राट चुन लिया गया. ऋषिकुल देखते रह गए. अभी तक उन्होंने राजतंत्रों को […]

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नियुक्ति

अकादमी के शीर्षस्थ पद के लिए प्रत्याशियों को बुलाया गया. भर्ती के लिए दो प्रकार की परीक्षाएं तय थीं. पहली परीक्षा के लिए प्रत्याशियों को एक हॉल में बिठाया गया. उनके ठीक सामने एक मंदिर था. मंदिर में एक त्रिशूल रखा गया था. त्रिशूल के आगे पत्र-पुष्प, फूलमालाएं, चंदन लेप, धूप-दीप-नैवेद्य रखे थे. बराबर में […]

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विविध की डायरी

बालकहानी विविध के दादू को डायरी लिखने का शौक है. बोर्डिंग में जाने पर विविध को घर की याद आई तो उसने भी कलम उठा ली. ये पन्ने उसी की डायरी के हैं, जो उसने अपने दादू को संबोधित करते हुए लिखे हैं— 17 फरवरी 2015 आज बोर्डिंग का तीसरा दिन है. मैं दो दिनों […]

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2012 in review

The WordPress.com stats helper monkeys prepared a 2012 annual report for this blog. Here’s an excerpt: 600 people reached the top of Mt. Everest in 2012. This blog got about 4,500 views in 2012. If every person who reached the top of Mt. Everest viewed this blog, it would have taken 8 years to get […]

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डॉ. सुरेंद्र विक्रम का बालसाहित्य

किसी भी भाषा अथवा विधा की समृद्धि उसके शोध प्रबंधों की संख्या से आंकी जा सकती है. वे इस बात का प्रमाण होते हैं कि साहित्यकारों तथा बुद्धिजीवियों ने अपनी भाषा को कितना सहेजा, संवारा और समृद्ध किया है. ताकि समकालीनों के अलावा दूसरे भाषा–भाषी, साथ में आने वाली पीढ़ियां भी उससे लाभान्वित हो सकें. […]

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2011 in review

The WordPress.com stats helper monkeys prepared a 2011 annual report for this blog. Here’s an excerpt: A New York City subway train holds 1,200 people. This blog was viewed about 4,700 times in 2011. If it were a NYC subway train, it would take about 4 trips to carry that many people. Click here to […]

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2010 in review

The stats helper monkeys at WordPress.com mulled over how this blog did in 2010, and here’s a high level summary of its overall blog health: The Blog-Health-o-Meter™ reads This blog is doing awesome!. Crunchy numbers A helper monkey made this abstract painting, inspired by your stats. A Boeing 747-400 passenger jet can hold 416 passengers. […]

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दंश : 16वीं किश्त

धारावाहिक उपन्यास   समस्याएं चुनौती ही नहीं बनतीं, आदमी को जीना भी सिखाती हैं. कई दिनों की अतृप्त आत्मा….गर्मागरम भोजन. बड़ीम्मा का स्नेह–सत्कार. भटकाव के बाद कुछ देर का आराम. जिंदगी बहुरंगी होती है. पर उस क्षण दुनिया की सभी रंगीनियां उस भोजन में विराजमान थीं. शायद इसलिए कि कई दिन के अंधकार के बाद […]

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