Tag Archive | व्यंग्य

जल्दी कर स्लमडा॓ग

फत्तु उठ! सूरज निकलने से पहले उठ. नेताजी की आन-बान-शान के लिए उठ. अपनी भूख और ईमान के लिए उठ. हाथ-मुंह धो. कुल्ला कर. तेल चुपड़. बाल मत संवार. इन्हें रास्ते की धूल-मिट्टी के लिए खुला रख. समय बरबाद मत कर. बासी रोटी खा. काली चा पी. जल्दी कर. पोस्टर-झंडियां निकाल. निक्कर कस. फटी चप्पल […]

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बच्चू, तेरा भविष्य किसके हाथों में है?

फत्तु उठ. हाथ-मुंह धो. कुल्ला कर. पैर की बिबाइयों को मत देख. मैल मत खुरच. मैल छुट्टी के दिन खुरचना. जल्दी कर. रोटी मत मांग. मां काम पर गई है. वह पहले दूसरों का चूल्हा सुलगवाएगी. तभी घर आएगी. बापु की बात मान. भरे पेट आलस आता है. अभी पढ़ने जा. देर मत कर. अपनी […]

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गाय पर निबंध

फत्तु उठ! का॓पी-कलम निकाल. गाय पर निबंध लिख. फत्तु, गाय पर निबंध लिख. लिख ओऽम..! क्या कहा? भूख लगी है? भूख को भूल जा…लिख—ओऽऽम! अरे, मां बीमार है? चल मां को भूल जा, लिख—ओऽऽऽम! अच्छा, बापु ने मारा? मार को भूल जा, लिख—ओऽऽऽऽम! फत्तु लिखने पर ध्यान दे, लिख…गाय के चार टांग, चार थन, दो […]

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