Tag Archive | आखरमाला

वेन की कथा

‘वेन उदार है….’ ‘वेन वीर है….’ ‘वेन निष्पक्ष, न्यायकर्ता है….’ ‘वेन का जन में विश्वास है….’ ‘अब से वेन ही हमारे सम्राट होंगे….’ ‘सम्राट अमर रहें….’ जयघोष के साथ दर्जनों मुट्ठियां हवा में लहराने लगीं. लोग खुशी से चिल्ला उठे. वेन को सम्राट चुन लिया गया. ऋषिकुल देखते रह गए. अभी तक उन्होंने राजतंत्रों को […]

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नियुक्ति

अकादमी के शीर्षस्थ पद के लिए प्रत्याशियों को बुलाया गया. भर्ती के लिए दो प्रकार की परीक्षाएं तय थीं. पहली परीक्षा के लिए प्रत्याशियों को एक हॉल में बिठाया गया. उनके ठीक सामने एक मंदिर था. मंदिर में एक त्रिशूल रखा गया था. त्रिशूल के आगे पत्र-पुष्प, फूलमालाएं, चंदन लेप, धूप-दीप-नैवेद्य रखे थे. बराबर में […]

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विविध की डायरी

बालकहानी विविध के दादू को डायरी लिखने का शौक है. बोर्डिंग में जाने पर विविध को घर की याद आई तो उसने भी कलम उठा ली. ये पन्ने उसी की डायरी के हैं, जो उसने अपने दादू को संबोधित करते हुए लिखे हैं— 17 फरवरी 2015 आज बोर्डिंग का तीसरा दिन है. मैं दो दिनों […]

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एक पुराना सवाल

लघुकथा गणित के सवालों से तो आप खूब दो-चार हुए होंगे. परंतु इस सवाल का गणित से कोई वास्ता नहीं है. या शायद हो भी. दरअसल यह एक बहुत पुराना सवाल है. एक बकरी है, जिसके गले में रस्सी है. रस्सी का दूसरा छोर खूंटे से बंधा है. बकरी को आजादी है कि रस्सी के […]

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जनसंस्कृति की रक्षा के लिए जरूरी है आर्थिक विकल्पों की खोज

सरकार रिटेल सेक्टर के दरवाजे विदेशी निवेश के लिए खोलने जा रही है. यूपीए सरकार का यह पूर्व–निर्धारित निर्णय था. यदि मनमोहन सरकार की चली होती तो इस फैसले पर पिछले कार्यकाल में ही मुहर लग जाती. आप चाहें तो इसको पूंजीपतियों के सहारे टिकी सरकारों की विवशता भी कह सकते हैं. खुली अर्थव्यवस्था में […]

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जरूरी है जनांदोलनों की चमक का बने रहना

खबर है कि अन्ना हजारे के नेतृत्व में चलाया जा रहा आंदोलन अपनी चमक खो रहा है. जिस आंदोलन ने सरकार को संसद में बहस करवाने के लिए विवश कर दिया उसकी चमक मात्र चार महीने में फीकी पड़ जाना किन्हीं अर्थों में चिंताजनक भी है. कुछ विद्वान आंदोलन की असफलता का कारण इसकी मध्यवर्ग […]

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