स्याह हाशिये

जंगलतंत्र

प्यास बुझाने की चाहत में नदी तट पर पहुंची बकरी वहां मौजूद शेर को देख ठिठक गई. शेर ने गर्दन घुमाई और चेहरे को भरसक सौम्य बनाता हुआ बोला—‘अरे, रुक क्यों गई, आगे आओ. नदी पर जितना मेरा अधिकार है, उतना तुम्हारा भी है.’ शेर की बात को बकरी टाले भी तो कैसे! उसने मौत […]

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नींद

 मुंह अंधेरे चक्की की घरघराहट सुन ईश्वर की नींद उचट गई— ‘ऊंह! दिन–भर घंटों की आवाज और रात को चक्की की घर्र–घर्र, लोग सोने तक ही नहीं देते, लगता है पागल हो जाऊंगा!’ ईश्वर बड़बड़ाया और उठकर आवाज की दिशा में बढ़ गया. एक झोपड़ी के आगे वह रुका. दरवाजा खड़खड़ाने जा रहा था कि […]

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निष्कासन

वह दुनिया का शायद इकलौता गांव था. जहां न कोई छोटा था, न बड़ा. सब अपनी मेहनत का खाते. मिल–जुलकर रहते. सुख में साझा करते, दुख में साथ निभाते. वहां जो भी था, सबका था. जो नहीं था, वह किसी के भी पास नहीं था. एक दिन गांव में एक तिलकधारी आया— ‘मैं तुम्हें ईश्वर […]

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झूठ का सच

बाजार से गुजरते हुए कुत्ते की नजर दुकान में टंगे एक चित्र पर पड़ी तो गढ़ी की गढ़ी रह गई. उसके लिए उसकी कुतिया दुनिया की सबसे खूबसूरत मादा थी. सड़क पर चलते समय वह दोपाया मादाओं को रोज ही देखता. उनके पुते हुए चेहरे देख उसे हंसी आने लगती. निश्चय ही उनमें कुछ सुंदर […]

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दूरदृष्टि

महाभारत-कथा के अंतिम सर्ग तक सुनते-सुनते कुत्ता अचानक चौंक पड़ा, सोचने लगा—आखिर कोई तो बात होगी जो धर्मराज युधिष्ठिर समेत सारे पांडव हिमालय पर एक-एक कर गलते चले गए. स्वर्ग-द्वार पर सशरीर दस्तक देने वाला वाला प्राणी एक कुत्ता था. उसका पूर्वज. धर्म का देवता. कितना महान होगा वह. लेकिन आदमी है कि सिर्फ पांडवों […]

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अपराधबोध

सड़कछाप कुत्ता मजदूरों, कबाड़ बीनने वाले बच्चों, भिखारियों और फटेहाल आदमियों पर ही क्यों भौंकता है, कोई यह जाने न जाने, कुत्ते को अच्छी तरह मालूम था. पिछली बार वह एक धनी मालिक के बंगले पर रहता था. उसके पास बेशुमार दौलत थी. बड़े-बड़े आदमियों का वहां आना-जाना था. पर न जाने क्यों वह डरता […]

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देवता

बीच रास्ते में बने उस धर्मालय की भौगोलिक स्थिति बड़ी विकट थी. रास्ता पहले ही संकरा और भीड़-भाड़ वाला था. धर्मालय से आगे सड़क और भी संकरी हो जाती. तीव्र गति से दौड़ रहे वाहनों के ब्रैक वहां पहुंचकर चरमराने लगते. दिन में वाहनों की भीड़ और भी बढ़ जाती. इतनी कि उसे पार करना […]

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मान-मर्दन

कुत्ते को शोर-शरावा नापसंद था. लेकिन बरात देखना, उसके पीछे-पीछे चलना उसे खूब भाता. जब वह दूल्हे के आगे-आगे लोगों को नाच के नाम पर उछल-कूद मचाते देखता, तो आपा बिसरा देता. नाचने वालों में बेजान-फीके चेहरे भी होते और खाए-अघाए भी. मगर खाए-अघाए लोग कुछ ज्यादा ही नफासत से नाचते. उनकी स्त्रियां कमर लचकाने […]

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कर्मकांडी

पंडितजी पड़ोस के गांव से कर्मकांड निपटाकर लौट रहे थे. सिर पर बड़ी-सी पगड़ी थी. माथे पर भव्य तिलक. गले में माला. फूला हुआ पेट और चेहरे पर तृप्ति का आनंद. कुत्ता भी पेट-भर जाने के बाद घूमने के लिए जंगल की ओर निकला था. बस्ती से बाहर दोनों परस्पर टकरा गए. कुत्ता अपने आप […]

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कथा गुणीराम

एक घर के बाहर मेहमानों की भीड़ और भीतर से आती पकवानों की मनभावन गंध से कुत्ते ने अनुमान लगा लिया कि आज कोई भोज है. वह एक ठिकाना देख वहीं लेट गया. तब तक बस्ती के दूसरे कुत्ते भी वहां पहुंच चुके थे. आदमी के साथ रहते हुए वे उसके तीज-त्योहारों, ब्याह-भोज के बारे […]

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