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आदमी

एक बुजुर्ग कुत्ता अपने साथियों को उपदेश दे रहा था-
’एक जमाना था जब कोई किसी का गुलाम न था. सभी कुत्ते मजे से घूमा करते थे. किसी को किसी का डर नहीं था. उसके बाद आदमी आया. अपनी हवस् में उसने पहले धरती को बांटा. फिर ऊंची-ऊंची इमारतें खड़ी कीं. और फिर हम जैसे जानवरों को कैद करना शुरू कर दिया. आदमी की चालाकी को समझे बिना हम आपस् में लड़ने लगे. आज हालत यह है कि जब भी एक गली का कुत्ता दूसरी गली में जाता है, वहां के कुत्ते उसके पीछे पड़ जाते हैं. आदमी ने हमें हमारा दुश्मन बना दिया है.’  सभा में मौजूद कुत्तों में खलबली मचने लगी. बुजुर्ग कुत्ता जैसे ताड़ गया हो, सांस लेने के बाद बोला-
’मुझे इसका अफसोस है. मौका मिले तो मैं इसका प्रायश्चित करना चाहूंगा.’
इसपर कई युवा कुत्ते एक साथ् उबल पड़े, ’आप क्यों करें प्रायश्चित. कुसूर यदि आदमी का है तो दंड भी उसी को मिलना चाहिए.’
’इन दिनों मेरा दिमाग काम नहीं करता. इससे मैं हमेशा भौंकता रहता हूं. आदमी का कहना है कि मैं पागल हो चुका हूं. आप् मुझे आदेश दें. एक सांस में कम से कम पचास आदमियों को काटकर ही दम लूंगा. इससे कहीं ज्यादा मेरे डर से पागल हो जाएंगे.’  यह् सुनते ही कई कुत्ते जोश के साथ भौंकने लगे.
’इस लड़ाई में तुम अकेले नहीं हो. हम भी तुम्हारे साथ हैं. हम सब मिलकर हमला करें तो आदमियों की पूरी बस्ती पर भारी पडेंगे.’ बुजुर्ग कुत्ते ने उन्हें समझाने का प्रयास किया. मगर जोश में कुत्तों ने उसकी एक न सुनी. आदमी को मजा चखाने का प्रण लेकर सारे कुत्ते वहां से निकल पड़े. सबके चेहरे पर गुस्सा था. सभी आदमी को फाड़ खाने का इरादा रखते थे. वे तेजी से बस्ती की ओर बढ़ रहे थे कि रास्ते में एक आदमी से टकरा गए. कुत्ते उसे घेरकर खड़े हो गए.
’क्या बात है.’ आदमी उन्हें देखकर मुस्कराया. यह् देख कुत्ते असमंजस में पड़ गए.
’क्या तुम्हें हमसे जरा भी डर नहीं लग रहा?’ एक कुत्ते आदमी से ने गुर्राते हुए सवाल किया.
’इसमें डर कैसा?’ कुत्ते तो हमेशा से आदमी के वफादार रहे हैं. मैं भाग्यशाली हूं कि इतने सारे कुत्ते मेरी सुरक्षा में लगे हैं. इनके बल पर तो मैं इंद्र के साम्राज्य से भी टकरा सकता हूं.
’यह् इंद्र का साम्राज्य क्या है?’
’अरे, क्या तुम नहीं जानते?’ आदमी ने हैरानी का प्रदर्शन किया, ’इंद्र के दरबार में आनंद ही आनंद है. रात-दिन नौकर-चाकर सेवा में लगे रहते हैं. तरह-तरह के स्वादिष्ट भोजन, आराम के लिए मुलायम गद्दे और कालीन, रहने के लिए आलीशान महल…’
’तब तो हमें इंद्र के साम्राज्य पर फौरन कब्जा कर लेना चाहिए…’ कई कुत्ते एक साथ बोल पड़े.
’आप सब की भी यही मर्जी है तो मैं पीछे नहीं हटूंगा. इंद्र से निपटने के लिए यूं तो मैं अकेला ही काफी हूं, फिर भी आपको ले जाना इसलिए चाहता हूं, ताकि आप देख लें कि मैंने जो कहा वह् एकदम सच है. लेकिन मुश्किल है कि मैं मेरे पास केवल पांच जनों का भोजन है. इसलिए आप अपने बीच से पांच सदस्य चुन लें जो इंद्र के दरबार में पहले जाना चाहते हैं.’
आदमी की बात सुनकर कुत्ते एक-दूसरे की ओर देखने लगे. ’पहले मैं-पहले मैं’ की भावना हर एक दिलो-दिमाग पर छा गई. जब बातचीत् से कोई हल न निकला तो वे एक-दूसरे पर टूट पड़े. मौका देख आदमी वहां से प्रस्थान कर गया.
मुंह् लटकाए कुत्ते अपने ठिकाने पर पहुंचे. उनकी बात सुनने के बाद बुजुर्ग कुत्ते ने कहा- ’लालची तो हम सभी हैं. मगर आदमी बुद्धिमान भी है. इसलिए वह् हम जानवरों पर राज करता आया है.’
उस दिन के बाद कुत्तों ने आदमी के विरुद्ध जाना, उसका विरोध करना छोड़ दिया. अब जब भी वे आदमी के करीब आते हैं, पूंछ हिलाने लगते हैं.
ओमप्रकाश् कश्यप
एक बुजुर्ग कुत्ता अपने साथियों को उपदेश दे रहा था-
’एक जमाना था जब कोई किसी का गुलाम न था. सभी कुत्ते मजे से घूमा करते थे. किसी को किसी का डर नहीं था. उसके बाद आदमी आया. अपनी हवस् में उसने पहले धरती को बांटा. फिर ऊंची-ऊंची इमारतें खड़ी कीं. और फिर हम जैसे जानवरों को कैद करना शुरू कर दिया. आदमी की चालाकी को समझे बिना हम आपस् में लड़ने लगे. आज हालत यह है कि जब भी एक गली का कुत्ता दूसरी गली में जाता है, वहां के कुत्ते उसके पीछे पड़ जाते हैं. आदमी ने हमें हमारा दुश्मन बना दिया है.’  सभा में मौजूद कुत्तों में खलबली मचने लगी. बुजुर्ग कुत्ता जैसे ताड़ गया हो, सांस लेने के बाद बोला-
’मुझे इसका अफसोस है. मौका मिले तो मैं इसका प्रायश्चित करना चाहूंगा.’
इसपर कई युवा कुत्ते एक साथ् उबल पड़े, ’आप क्यों करें प्रायश्चित. कुसूर यदि आदमी का है तो दंड भी उसी को मिलना चाहिए.’
’इन दिनों मेरा दिमाग काम नहीं करता. इससे मैं हमेशा भौंकता रहता हूं. आदमी का कहना है कि मैं पागल हो चुका हूं. आप् मुझे आदेश दें. एक सांस में कम से कम पचास आदमियों को काटकर ही दम लूंगा. इससे कहीं ज्यादा मेरे डर से पागल हो जाएंगे.’  यह् सुनते ही कई कुत्ते जोश के साथ भौंकने लगे.
’इस लड़ाई में तुम अकेले नहीं हो. हम भी तुम्हारे साथ हैं. हम सब मिलकर हमला करें तो आदमियों की पूरी बस्ती पर भारी पडेंगे.’ बुजुर्ग कुत्ते ने उन्हें समझाने का प्रयास किया. मगर जोश में कुत्तों ने उसकी एक न सुनी. आदमी को मजा चखाने का प्रण लेकर सारे कुत्ते वहां से निकल पड़े. सबके चेहरे पर गुस्सा था. सभी आदमी को फाड़ खाने का इरादा रखते थे. वे तेजी से बस्ती की ओर बढ़ रहे थे कि रास्ते में एक आदमी से टकरा गए. कुत्ते उसे घेरकर खड़े हो गए.
’क्या बात है.’ आदमी उन्हें देखकर मुस्कराया. यह् देख कुत्ते असमंजस में पड़ गए.
’क्या तुम्हें हमसे जरा भी डर नहीं लग रहा?’ एक कुत्ते आदमी से ने गुर्राते हुए सवाल किया.
’इसमें डर कैसा?’ कुत्ते तो हमेशा से आदमी के वफादार रहे हैं. मैं भाग्यशाली हूं कि इतने सारे कुत्ते मेरी सुरक्षा में लगे हैं. इनके बल पर तो मैं इंद्र के साम्राज्य से भी टकरा सकता हूं.
’यह् इंद्र का साम्राज्य क्या है?’
’अरे, क्या तुम नहीं जानते?’ आदमी ने हैरानी का प्रदर्शन किया, ’इंद्र के दरबार में आनंद ही आनंद है. रात-दिन नौकर-चाकर सेवा में लगे रहते हैं. तरह-तरह के स्वादिष्ट भोजन, आराम के लिए मुलायम गद्दे और कालीन, रहने के लिए आलीशान महल…’
’तब तो हमें इंद्र के साम्राज्य पर फौरन कब्जा कर लेना चाहिए…’ कई कुत्ते एक साथ बोल पड़े.
’आप सब की भी यही मर्जी है तो मैं पीछे नहीं हटूंगा. इंद्र से निपटने के लिए यूं तो मैं अकेला ही काफी हूं, फिर भी आपको ले जाना इसलिए चाहता हूं, ताकि आप देख लें कि मैंने जो कहा वह् एकदम सच है. लेकिन मुश्किल है कि मैं मेरे पास केवल पांच जनों का भोजन है. इसलिए आप अपने बीच से पांच सदस्य चुन लें जो इंद्र के दरबार में पहले जाना चाहते हैं.’
आदमी की बात सुनकर कुत्ते एक-दूसरे की ओर देखने लगे. ’पहले मैं-पहले मैं’ की भावना हर एक दिलो-दिमाग पर छा गई. जब बातचीत् से कोई हल न निकला तो वे एक-दूसरे पर टूट पड़े. मौका देख आदमी वहां से प्रस्थान कर गया.
मुंह् लटकाए कुत्ते अपने ठिकाने पर पहुंचे. उनकी बात सुनने के बाद बुजुर्ग कुत्ते ने कहा- ’लालची तो हम सभी हैं. मगर आदमी बुद्धिमान भी है. इसलिए वह् हम जानवरों पर राज करता आया है.’
उस दिन के बाद कुत्तों ने आदमी के विरुद्ध जाना, उसका विरोध करना छोड़ दिया. अब जब भी वे आदमी के करीब आते हैं, पूंछ हिलाने लगते हैं.
ओमप्रकाश कश्यप
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One comment on “आदमी

  1. आज समझा दुम हिलाने का राज!!

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