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जैसा उन्होंने किया, वैसा कोई न करे.

 

कुत्ता अपने परिवार से मिला तो बहुत थका हुआ था. कुतिया उसके इंतजार में थी. परिवार के मुखिया को आते देख वह फौरन उसके पास दौड़कर पहुंच गई.

क्यों जी, इतने दिनों में क्या तुम्हें मेरी जराभी याद नहीं आई?’ कुतिया ने प्यारभरा उलाहना दिया.

मैं मीलों चलकर तेरे पास पहुंचा हूं, क्या यह छोटी बात है! इस बीच न जाने कितनी बार अजनबी कुत्तों ने मुझपर हमला किया. न जाने कितनी बार मैं गाड़ियों के नीचे आकर कुचलने से बचा. न जाने कितनी बार हिंस्र आदमी ने मोटा डंडा लेकर मेरा पीछा किया. पर मैं तेरी याद दिल में लिए भागता रहा, बस भागता ही रहा. जरा सोच आदमी का अगर एक भी डंडा मेरी पीठ पर पड़ जाता तो….’

जाने दो जी, मैं समझ गई, आप ऐसी बात मुंह से मत निकालिए.’ कुतिया ने रोक दिया. कुछ देर दोनों एकदूसरे से सटकर खड़े रहे. मानो मूक संवाद कर रहे हों. आखिर कुतिया ने ही मौन भंग किया:

आप इतनी दूर से चलकर आए हैं. रास्ते में कुछ अनोखी चीजें भी देखी होंगी. क्या मुझे कुछ नहीं बताएंगे?’

देखा तो बहुत कुछ, परंतु जो बातें मैं खुद भूल जाना चाहता हूं, उन्हें तू जानकर क्या करेगी!’ कुत्ता बोला.

मेरी जिंदगी तो बच्चों को पालनेपोसने में ही निकली जा रही है, कहीं आजा भी नहीं पाती. बाहरी दुनिया को जानने का सिवाय तुम्हारे रास्ता ही क्या है?’ कुतिया ने अपनापा जताया तो कुत्ता बताने लगा—

जब मैं आ रहा था तो रास्ते में दो भाई मिले. दोनों घर से साथसाथ कमाई करने चले थे. बड़ा मेलजोल रहा होगा दोनों में. इसलिए दोनों ने एक ही पोटली में गुड़, चने और आटा बांध रखा था. भूख लगती तो छोटा भाई आग जलाता. बड़ा मोटीमोटी रोटियां सेकता. फिर दोनों मिलजुलकर चूरमा बनाते और मिल बांटकर खाते. बच जाता तो मेरे आगे भी डाल देते. मुझे उनके डाले गए चूरमे का लालच नहीं था. खुले जंगल में पेट भरने को कुछ न कुछ तो मिल ही जाता है. मैं तो उनके आपसी प्यार पर मर मिटा था. जो मानुस जात में कम ही देखने को मिलता है. इसलिए काफी दूर तक उनके साथ चलता रहा…’ कुत्ता कहानी सुनातासुनाता अचानक रुक गया.

आगे क्या हुआ जी. रुक क्यों गए…’

अब रहने देयहां से आगे की कहानी कही नहीं जा रही…’

परंतु आपने तो मेरे भीतर इतनी ललक जगा दी है. दोनों भाइयों का आगे क्या हुआ, यह जानने के लिए मैं बड़ी उतावली हो रही हूं.’ कुतिया ने कहा. कुत्ता चुप्पी साधे रहा.

आपने बताया कि आप जंगल से गुजर रहे थे. कहीं ऐसा तो नहीं कि उनमें से किसी एक भाई को खूंखार जानवर उठा ले गया हो?

अगर ऐसा हो जाता तो मैं उसे दुर्घटना मान लेता और उस जानवर को गालियां देता हुआ बाकी का सफर आसानी से पूरा कर लेता.’

फिर?’ कुतिया सचमुच उतावली हुई जा रही थी.

दोनों जंगल से होकर गुजर रहे थे. जहां रात होती, सो जाते. भोर की किरन दिखाई पड़ते ही सफर फिर शुरू हो जाता. एक सुबह बड़ा भाई जागा तो बड़ा प्रसन्न था. कारण पूछने पर उसने बताया—‘रात मैंने एक सपना देखा है?’

कैसा सपना?’ छोटे ने पूछा.

बहुत अच्छा सपना. हुआ यह कि मैंने एक व्यापार शुरू किया, उसमें मुझे जबरदस्त मुनाफा हुआ. जिससे मैं सिर्फ छह महीने में करोड़पति बन गया हूंमेरे पास खूब बड़ा बंगला है, गाड़ी है, नौकरचाकर हैं. साथ मे एक खूबसूरत पत्नी भी है…!’

अच्छा, और कुछ?’ छोटे ने प्रश्न किया, ‘सपने में कुछ और भी तो देखा होगा?’

रहने दे, और जो हुआ वह बताने की मेरी हिम्मत नहीं है. तू तो जानता है कि मेरा सपना कभी झूठा नहीं होता.’

फिर भी बताओ तो भइया?’

तो सुन, मैंने देखा कि व्यापार में तुझे बहुत घाटा हुआ है. तेरी हालत भिखारियों जैसी हो गई है….’ बड़े ने कहा. छोटे ने बात को हंसकर टालने की कोशिश की. परंतु नाकाम रहा. उसका चेहरा लटक गया. तब बड़े ने उसको तसल्ली देते हुए कहा— ‘तू फिक्र क्यों करता हूं. मैं तो हूं न, तेरे साथ, तेरा भाई.’

बड़े की तसल्ली काम न आई. छोटे का मुंह लटका तो लटका ही रह गया. बड़े ने उसके बाद भी समझाने की काफी कोशिश की. पर सब बेकार. दोनों पूरे दिन चलते रहे. मैं भी उनके पीछेपीछे चलता रहा, लेकिन अब उनके पीछे चलने का सारा जोश समाप्त हो चुका था. खैर शाम हुई. दोनों भाइयों ने साथसाथ खाना खाया और सो गए…’ कुत्ता फिर चुप हो गया.

अब क्या हुआ जी?’ कुतिया ने फिर टोका तो कुत्ता अनमनासा बताने लगा—‘सुबह मेरी सबसे पहले आंख खुलीं. रोज बड़ा भाई पहले उठता था. उसकी खटपट से ही मैं जागता था. उस दिन कोई आहट न हुई तो मैं भी देर तक सोता रहा. जागा तो सिर पर सवार सूरज को देखकर हैरान रह गया. कहीं वे मुझे छोड़कर तो नहीं चले गए—सोचता हुआ मैं उन्हें खोजने लगा. मगर जो देखा उससे तो मेरे होश ही उड़ गए. जिस जगह वे सोए थे, वहां उनके शव पडे़ थे. दोनॊं के मुंह से झाग निकल रहे थे.’

किसी विषधर ने डस लिया होगा?’ कुतिया के मुंह से आह निकली.

दुःख तो यही है कि कोई विषधर उन्हें डसने नहीं आया था. वे खुद एकदूसरे के लिए विषधर बने थे.’ कुत्ता पलभर के लिए रुका, फिर बोला— ’छोटा भाई यह सोचकर परेशान था कि एक दिन उसका बड़ा भाई उससे अधिक धनवान हो जाएगा. जिससे समाज में उसकी इज्जत घट जाएगी, लोग उसे निकम्मा कहा करेंगे. इसलिए उसने बड़े के चूरमा मे जहर मिला दिया था.

उफ! और छोटा भाई, उसको किसने मारा?’

बड़े भाई ने, वह यह सोचकर घबरा गया था कि सपने की बात सच होते ही वह तो मालदार हो जाएगा, जबकि छोटा गरीब रह जाएगा. उस हालत में वह बारबार उसके पास मदद के लिए आया करेगा. छोटे भाई की तंगहाली देख लोग उसे ताने दिया करेंगे— इससे तो अच्छा है कि पहले ही उससे छुटकारा पा लिया जाए. इसलिए मौका देख उसने भी छोटे के भोजन में जहर मिला दिया था.’

‌’नासपीटे, कुलच्छ्ने! एक सपने से ही डर गए.’ कुतिया ने गालियां दीं. लेकिन अगले ही पल उसका मन उदासी से भर गया, बोली—’कुछ भी हो जी, दोनों थे तो इंसान ही. आज की रात हम उन दोनों के लिए शोक करेंगे और श्वानदेव से प्रार्थना करेंगे कि जैसा उन्होंने किया, वैसा कोई न करे.

ओमप्रकाश  कश्यप

 

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