2 टिप्पणियां

ईश्वर की वापसी

 

कुत्ता एक ऐसे मैदान में पहुंचा जिसके चारों कोनों पर मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर और गुरुद्वारा बने थे. उनके पीछे ऊंचे-ऊंचे घर थे, वैभव और संपन्नता में एक-दूसरे से होड़ लेते हुए.

                 उम्मीद है कि यहां खाने-पीने की अफरात रहेगी. इसलिए कुछ दिन तो यहां आराम से बिता ही सकूंगा.’ सोचते हुए कुत्ता वहीं लेट गया. एक चूहे को मैदान के इस कोने से उस कोने तक जाते देखा तो उसकी आंखों की चमक सवाई हो गई—

उस चूंहे की सेहत बता रही है कि यहां खूब चढ़ावा आता होगा; यानी यहां रुकने का मेरा फैसला गलत नहीं है.’ यह सोचते हुए  कुत्ते ने अपनी आंखें बंद कर ली. चलते-चलते थकान हो आई थी, सो आंखों में नींद फुसफुसाने लगी—

कुछ देर सो भी जाऊं तो बुराई क्या है. मुझे नींद भी इतनी गहरी नहीं आती कि पदचाप सुनकर बनी रहे. जैसे ही कोई भक्त आएगा, आंखें अपने आप खुल जाएंगी.’ उसके बाद कुत्ता लेटा तो बस लेटा रह गया. शाम हुई, फिर अंधेरा गहराने लगा.

अरे!’ कुत्ते की आंखें खुलीं तो चौंक पड़ा, ‘चार धर्मस्थल और दिन-भर में एक भी भक्त नहीं…’ तभी उसकी निगाह उस चूहे पर पड़ी जो उससे कुछ दूरी पर सुरक्षित दूरी बनाकर बैठा हुआ था.

माफ करना मेरे दोस्त!’ चूहा बोला—‘हमारे संबंध ऐसे नहीं हैं कि मैं तुमपर भरोसा कर सकूं. मेरी मां तो अक्सर कहती है कि कुत्तों पर भरोसा कभी मत करना. वे आदमी के दोस्त होते हैं. फिर भी मैं खुद को रोक नहीं पाया. तुमने दिन में कुछ खाया-पिया नहीं है, और मैं जानता हूं कि भूख हम सभी की कमजोरी है.’

यह भूख ही हमें स्वार्थी बनाती है?’

इस शहर में तीन दिन पहले दंगा हुआ था. तभी से कर्फ्यू लगा हुआ है. सरकार कर्फ्यू हटाती है, तो एक-दूसरे के खून के प्यासे लोग मारकाट पर उतर आते हैं.’

उफ! अब तो इतना समय भी नहीं कि मैं किसी दूसरी बस्ती तक जा सकूं.’ कुत्ता अपनी भूख से अधिक कुछ समझ ही नहीं पा रहा था.

काश! मैं तुम्हें अपने बिल तक ले जा सकता! हालांकि मेरी मां को यह कभी पसंद नहीं करती कि कोई बाहर का प्राणी हमारे अन्न-भंडार तक जाए.’

अन्न-भंडार?’ कुत्ता यकायक चौंक पड़ा.

इस मायने में हम चूहे तुमसे कहीं ज्यादा समझदार होते हैं. रात में जब तुम कुत्ते गला फाड़-फाड़कर चिल्लाते रहते हो, हम चुपचाप अपना अन्न-भंडार भरने में जुटे रहते हैं. इसलिए तो चाहे कर्फ्यू लगे या अकाल पड़े, पांच-सात महीनों तक हम चूहों का कुछ नहीं बिगाड़ पाते.’

भूख से व्याकुल कुत्ते को चूहे की बातें बकवास ही लगीं. उसने अपनी आंखें बंद कर लीं. सुबह की प्रतीक्षा में. पूरा शहर सन्नाटे से घिरा था. जब-तक सिपाहियों के बूटों की आवाज गूंजने लगती, जिन्हें कुत्ता भली-भांति पहचानता था. मच्छरों की भिन-भिन, चिलचट्टों की ‘किटरकिटर’ के बीच भूख की कुलमुलाहट भी बेचैन करती रही. इस बीच जाने कब आंख लग गई, उसको पता ही नहीं चला.

सहसा उसकी आंखों के आगे तेज रोशनी छा गई. उनींदी आंखों से कुत्ते ने जो देखा हैरान रह गया. मंदिर-मस्जिद-गिरिजाघर और गुरुद्वारे से एक एक भव्य आकृति निकली. चारों के चेहरे-मोहरे एकसमान थे. मानों एक ही गर्भ की उपज हों. चारों मैदान के बीचोंबीच आकर खड़े हो गए. पहले उन्होंने एक-दूसरे की ओर देखा, फिर अपने-अपने ठिकाने पर नजर दौड़ाई, फिर बोले, चारों एक साथ, एकस्वर, एक रंग-ढंग, एक लहजे, एक रूपाकार, एक जैसा, उनकी आवाज भी एक जैसी थी, मानो चारों कंठों से एक ही ध्वनि निकल रही हो—

मैंने अपने भक्तों की इच्छाओं को अभिव्यक्ति देने, उनका मान रखने के लिए जैसा उन्होंने चाहा, वही किया. जो उसने मुझे पहनाया वही पहना, जैसा भी खिलाना चाहा, प्यार से खाया. उन्होंने मेरे उपदेशों को गीता-बाईबिल-कुरआन और गुरुग्रंथ साहिब का नाम दिया, मैंने माना. जिस रूप में उन्होंने मुझे पसंद किया, मैं वैसा बना, जिस इमारत में उसने मुझे रहने को कहा, वहां मैं रहा. मैंने उसकी हर बात चुपचाप मान ली. बदले में मैंने उससे सिर्फ इतना कहा, आपस में मिलकर रहो, एक-दूसरे से प्यार करॊ, कम से कम मेरे नाम पर कोई झगड़ा मत करो, पर उसने मेरी एक बात भी नहीं मानी. ऐसे में मेरा यहां रहने का कोई औचित्य नहीं है…मैं चलता हूं.’

कुत्ते ने देखा, इसके बाद वे चारों गले मिलने के लिए आगे बढ़े और फिर एक-दूसरे में समा गए. कुत्ता कुछ समझ पाए, अपने विस्मय से बाहर आ सके, उससे पहले की उसने एक चमक को आसमान की ओर जाते देखा.

उसके बाद तो एक भी पल वहां ठहर पाना कुत्ते को भारी लगने लगा. वह उठा और अंधेरे में ही अनजान दिशा की ओर बढ़ने लगा.

 ओमप्रकाश कश्यप

Advertisement

2 comments on “ईश्वर की वापसी

  1. खूबसूरती से आपने अपनी बात कह दी। अच्छी प्रस्तुति। वाह।

    मंदिर को जोड़ते जो मस्जिद वही बनाते।
    मालिक है एक फिर भी जारी लहू बहाना।।

    मजहब का नाम लेकर चलती यहाँ सियासत।
    रोटी बड़ी या मजहब हमको जरा बताना।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    http://www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: