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पप्पु मत बन

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फत्तु उठ. नहाधो. पूजापाठ कर. आलस छोड़. बोतल निकाल. एकदो घूंट मार. नेता नाम ले. वोट डालने चल. फत्तु मन में ले विश्वास, बिन किसी आस, भूखे पेट, नंगे पांव, हंसते हुए चेहरे, सूनी आंखों सहित वोट डालने चल. जल्दीजल्दी चल. देर मत कर. लोकतंत्र का सारथी, चुनाव का महारथी बन. गर्दन ऊपर मत उठा. मतदान केंद्र पर बैठे कार्यकर्ताओं की आंखों में मत झांक. उनके चेहरों को ही इशारा मान. अपनी हैसियत जान. सोचनेसमझने में वक्त मत गंवा. जल्दी कर. वोट डाल. चुनाव-2009 के कुंभ में नहाने का पुण्य लूट. अच्छा और सच्चा नागरिक बन. मतदान से बचा तो पप्पु कहलाएगा. सरकार की नजर में गिर जाएगा. फत्तु, फत्तु ही रह. पप्पु मत बन. वोट डालने चल.

फत्तु नेताओं के चेहरे देख. चमक देख. धर्म देख, जाति देख. चेहरों की हकीकत. चमक का चरित्रा मत देख. अक्ल से काम ले. भाषण को राशन मत समझ. दो रुपये किलो के चावल की उम्मीद मत पाल. शिकायत छोड़. आंसू छिपा. वोट डाल. भूख तेरी किस्मत है. लंगोटी तेरा भाग्य. इनके साथ जीनामरना सीख. कोसना है तो किस्मत को कोस, परमात्मा को कोस. सरकार को मत कोस. नेताओं को दोष मत दे. सपने बेचना तो उनका धंधा है. वे धंधा करते हैं. मुनाफा बटोरते हैं. मुनाफे की व्यवस्था में आम आदमी एक उत्पाद है. जो भूख मारने के लिए खाता है. अमीरों के लिए कमाता है और जितना संभव हो, उन्हीं के लिए बचाता है. उदास मत हो फत्तु. मत सोच कि अपनी लाइन में तू अकेला है. यह तो दुनिया का मेला है, तेरे पीछे भी तेरे जैसों का जबरदस्त रेला है. हजारों लोग हैं, जो लोकतंत्र से उम्मीदें लगाए हैं, तेरी ही तरह वोट डालने आए हैं.

फत्तु तेरा धर्म सहना है—सो भूखे पेट रहना, दुःखों को सहना, गमों के साथ जीना. रोगों के साथ मरना सीख. अपने पेट पीठ की खाइयों. गरीबी की झांइयों को मत मिटा. चिंता छोड़, प्रभुनाम भज. अच्छी तरह मुस्करा. नेताओं का भाषण सुन. उनके शब्दों की हकीकत पर मत जा. ‘इंडिया शाइन’ और ‘इंडिया लीड’ के अंतर में मत उलझ. शब्दों के खेल का मजा ले. इन्हें मुखौटा कहने की गलती मत कर. अजीब निजाम है यह, जहां बदलाव सिर्फ मुखौटांे में नजर आता है. आदर्श शब्दों में सिमट जाता है. बहसें मयखानों में जन्म लेती हैं, और क्रांतियां का॑फी के प्यालों में जबां होती हैं. फत्तु इन क्रांतियों की हकीकत को समझ. परिवर्तन की उम्मीद से बच. अपना भविष्य, नेता का अतीत मत देख.

फत्तु इन चुनावों में उम्मीदवार अनेक हैं, पर तेरे लिए आ॑पशन केवल चार हैं. तुझे इन्हीं चारों में से किसी एक को अपनाना है. अपने पसंदीदा नेता को आगे लाना है, देश में लोकतंत्र बचाना है.

आ॑पशन नंबर एक : ये हिस्ट्रीशीटर हैं. हत्या, चोरी, डकैती, और बलात्कार के दर्जनों मुकदमें इनपर चालू हैं. इनका ‘धंधा’ बड़ा है. पर कानून रास्ते में अड़ा है. चुनाव जीतते ही ये उससे निपटेंगे. इनका मेनीफेस्टो कहता है कि जीतते ही देश में रामराज्य लाएंगे. हर थाने और अदालत में चमचों को बिठाएंगे. प्रशासन को अपनी मुट्ठी में लाएंगे, तभी तो इनके अपने तरक्की कर पाएंगे.

आ॑पशन नंबर दो: ये महान और अनुभवी हैं. पिछले चार चुनाव लगातार जीतते आए हैं. सिर्फ कुर्सी को अपना समझते हैं. इसलिए सरकार के साथ रहते हैं. पार्टियां आनीजानी हैं. दुनिया की तरह फानी हैं. चुनावों में इनका सिर्फ एक ही नारा है—कुर्सी मेरा जन्मसिद्ध प्यार है. इनका एक ही मेनीफेस्टो है कि प्यार में सबकुछ जायज है. इसलिए सामदामदंडभेद जैसे भी हो कुर्सी पाकर रहेंगे. जनता हराएगी तो लक्ष्मी जी की शरण में जाएंगे और राज्यसभा में हुल्लड़ मचाएंगे.

आ॑पशन तीन : ये सिर्फ ये हैं, अंगूठा टेक हैं. इनकी निष्ठाएं मौसम के साथ बदलती हैं. पुलिसचैकी कई बार जा चुके हैं. पिटकर आ चुके हैं. इनकी सिर्फ एक ही खासियत है कि ये प्रदेश के मुख्यमंत्री के साले हैं. जब ये मुस्कराते हैं तो इनके चमचे धमकी देने निकल जाते हैं,

आ॑पशन चार : इनका मेनीफेस्टो किसी भी तरह जनता की सेवा में आना है और सालदो साल में स्विस बैंक में खाता खुलवाना है. उस बैंक में जमा देश का धन वापस लाने का अडवाणी जी का दावा ये सुन चुके हैं. सुनकर हजार बार अपना सिर धुन चुके हैं. जब भी ऐसी कोई चर्चा होती है, तो उखड़ जाते हैं. अडवाणी जी पर पिल जाते हैं—

कहते हैं कि जब मंत्रियों में से आधे के खाते स्विस बैंक में होंगे तो अकेले अडवाणी जी क्या कर लेंगे. इन्हें पूरा भरोसा है कि बहुमत सरकार के नहीं, स्विस बैंक के खातेदारों के साथ होगा. और अडवाणी जी अगर ऐसा करेंगे तो उनकी सरकार का पलक झपकते बंटाधार होगा. अडवाणी जी समझदार हैं, इतनी तपस्या से मिली कुर्सी यूं ही नहीं गंवाएंगे. देखना, कुर्सी मिली तो यह वायदा भी राम मंदिर और धारा-357 की तरह भूल जाएंगे.

फत्तु अपनी अक्ल के घोड़े दौड़ा. इन चार आ॑पशनों में से कोई एक चुन. यदि नहीं चुन सकता तो अपना सिर धुन.  

ओमप्रकाश कश्यप   

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One comment on “पप्पु मत बन

  1. मार तीखी है आपकी. पर क्या करें जब नेता की चमरी गैंडे की पब्लिक की जान बकरे की. 😦

    फत्तू को राजनीति सिखा रहे हैं? 😀

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